आर्य कॉलेज में 'डायस्पोरा, मेमोरी और होमलैंड'  विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन

admin  6 hours, 42 minutes ago Top Stories

PANIPAT AAJKAL - शनिवार 14 फरवरी 2026,आर्य कॉलेज में अंग्रेजी विभाग और हरियाणा उच्चतर शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में आज साहित्य और समाज के गहरे संबंधों को टटोलते हुए "डायस्पोरा, मेमोरी और होमलैंड: नेरेटीव ऑफ बिलोंगिग एंड एलिएनेशन" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के ख्याति प्राप्त विद्वानों ने शिरकत की और प्रवासी साहित्य व विस्थापन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। आर्य कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र शिंगला, उपाध्यक्ष वीरेंद्र शिंगला व कॉलेज प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने सभी वक्ताओं और शोधार्थियों का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. अशोक कुमार प्रिंसिपल, एमएन कॉलेज, शाहबाद मारकंडा ने दीप प्रज्वलित कर की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि "डायस्पोरा केवल भौगोलिक विस्थापन नहीं है, बल्कि यह स्मृतियों के साथ जीने की एक निरंतर प्रक्रिया है। अपनी जड़ों से कटने का दर्द और नए परिवेश में खुद को ढालने की जद्दोजहद ही साहित्य को जन्म देती है।

कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रधान सुरेंद्र शिंगला ने अपने संदेश में कहा कि इस तरह के सेमिनार विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि डायस्पोरा जैसे वैश्विक विषयों पर चर्चा करने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय सामाजिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है।

प्रमुख वक्ता भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां से आए प्रोफेसर रवि भूषण ने मुख्य वक्ता के तौर पर विषय की आधारशिला रखी। उन्होंने 'होमलैंड' की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि कैसे एक प्रवासी व्यक्ति हमेशा दो दुनियाओं के बीच अंर्तद्वंध बना रहता है। उन्होंने स्मृतियों को एक पुल बताया जो मनुष्य को उसके अतीत और वर्तमान से जोड़े रखती हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के दयाल सिंह कॉलेज से आए सचिन एन. (एसोसिएट प्रोफेसर) ने संसाधन पुरुष के रूप में प्रवासी साहित्य के तकनीकी और भावनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने 'अकेलेपन' और 'पहचान के संकट' पर बात करते हुए कहा कि आज के वैश्विक युग में डायस्पोरा की कहानियाँ केवल विलाप नहीं हैं, बल्कि ये नए सांस्कृतिक मिलन की भी गाथाएं हैं।

कॉलेज प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य में 'होमलैंड' की तलाश वास्तव में खुद की तलाश है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए पूरे अंग्रेजी विभाग को बधाई दी और इसे कॉलेज की एक बड़ी उपलब्धि बताया।

कॉलेज के उप-प्रधान वीरेंद्र शिंगला ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि अपनी जड़ों और संस्कृति को याद रखना ही मनुष्य की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि कॉलेज भविष्य में भी ऐसे उच्च स्तरीय अकादमिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. बरती विश्वास ने बंगाली डायस्पोरा बंगाली भद्र लोक और छोटा लोक से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय डायसपोरा होमलैंड के बीच अंर्तद्वंध को बारिकी से बताया।

कॉलेज की उपाचार्या अनुराधा सिंह ने सेमिनार के तकनीकी सत्रों का संचालन करते हुए कहा कि "स्मृति और अकेलेपन के बीच जो संघर्ष एक प्रवासी झेलता है, वही इस विषय की आत्मा है।" उन्होंने विद्यार्थियों को शोध की बारीकियों से अवगत कराया और स्मृति की महत्ता पर प्रकाश डाला।  उन्होंने बताया कि सेमीनार में 103 शोधार्थियों ने भाग लिया और विषय पर अपने विचार सांझा किए।

मंच संचालन प्राध्यापिका डॉ. सोनिया सोनी व मानवी ने किया।

सेमीनार के दौरान कॉलेज के छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने विषय से संबंधित गहन चर्चा की और प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया। कॉलेज प्रबंधन ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस अवसर पर डॉ. मीनल तालस, डॉ. विजय सिंह, डॉ. अकरम खान, प्राध्यापिका सुमन शिंगला, रेखा, नेहा, ममता, निकिता, डिंपल, पंकज, दीपक समेत अन्य स्टाफ भी मौजूद रहे।

img
img