PANIPAT AAJKAL : श्री प्रेम मन्दिर पानीपत का 106 वां वार्षिक प्रेमसम्मेलन परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री मदन मोहन जी हरमिलापी महाराज परमाध्यक्ष श्री हरमिलाप मिशन हरिद्वार की अध्यक्षता में एवं श्री प्रेम मन्दिर पानीपत की परमाध्यक्षा परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता देवी जी महाराज के सानिध्य में प्रारम्भ हुआ। सम्मेलन के दौरान सत्र है। मदिर प्रांगण में श्री ठाकुर जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। ठाकुर जी के साथ सारे भक्तों ने फूल होली खेलकर वातावरण को रसमय तथा रंगमय बना दिया।
श्री वृन्दावन धाम से पधारे रसिक श्री निकुंज दास जी ने अपनी मण्डली के साथ श्री बांके बिहारी जी के साथ फूल होली का ऐसा समा बांधा कि पानीपत को श्री वृन्दावनधाम वना दिया।
अयोध्या धाम से पधारे श्री राधेश्याम जी रामायणी ने कहा कि प्रभु नाम का सतत जपते रहना चाहिए। नाम जप से मनुष्य का अन्तःकरण शुद्ध होता है और उसका जीवन एक उदाहरण बन जाता है। भरत जी चित्रकूट में श्रीराम को अयोध्या वापिस लाने के लिए गये तो वे किसी रथ आदि पर सवार न होकर पैदल ही चले। क्योंकि जब प्रभु राम वन में पैदल गये तो भरत जैसे सेवक के लिए सवारी करना कैसे उचित होता। उन्होंने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहा "सिर भर जांऊ उचित अस मोरा सब ते सेवक धरम कठोरा।" प्रभु से प्रेम में वाधायें भी बहुत आती है। क्योंकि प्रेम को निभाना इतना आसान भी नहीं है।
ब्रम्हर्षि जी बताया कि भगवान की सेवा पूजा चाहे न करो परन्तु भगवानके विधान से डरो जरूर। "रामहि केवल प्रेम पियारा जान लेहु जो जाननहारा"। आज मनुष्य के पाास सब कुछ है परन्तु यदि कमी है तो केवल शान्ति की। वह यहां तक कहने में भी नहीं हिचकता कि यदि भगवान को आना है तो हमारी सुविधानुसार आ कर मिले।
परमपूज्य स्वामी अरूणदास जी महाराज महामण्डलेश्वर श्री जगन्नाथ धाम हरिद्वार ने फरमाया कि आज मनुष्य गुरू को तो मानता है परन्तु गुरू की नहीं मानता तथा गुरू को एक मनुष्य अथवा शरीर समइता है जिससे उसके जीवन में लाभ की वजाय हानि अधिक हो जाती है।
श्री अनन्त प्रेम मन्दिर अम्बाला की परमाध्यक्षा परम पूज्या गीता वहन जी महाराज ने प्रेम का महत्व वताते हुए कहा कि प्रेम लगाना बहुत सरल है परन्तु उसका निभाना उतना ही कठिन है। क्योंकि प्रेम समर्पण करने का नाम है।
संध्या के सत्र में श्री ठाकुर जी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। ठाकुर जी के साथ सारे भक्तों ने फूल होली खेलकर ववातावरण को रसमय तथा रंगमय बना दिया।
सांयकाल के सत्र में पानीपत से श्री राधा वल्लभ सत्संग परिवार के श्री रवि अहुजा जी ने श्री कृष्ण के भजनों से सबको मन्त्रमुग्ध कर दिया।