PANIPAT AAJKAL , 03 फरवरी। जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ.आत्मा राम गोदारा ने जिले के किसानों को शीतलहर एवं पाले के प्रकोप से फसलों को होने वाले नुकसान के प्रति सतर्क किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मौसम में अत्यधिक ठंड और नमी के कारण फसलों में काली रतुआ, सफेद रतुआ, लेट ब्लाइट, झुलसा रोग तथा अन्य फंगस बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है, जिससे फसलों के अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण, दाना भराव, उपज और भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
डॉ. गोदारा ने बताया कि शीतलहर का प्रभाव विशेष रूप से गेहूं, सरसों एवं दलहनी फसलों पर अधिक देखा जाता है। लगातार कम तापमान रहने से पौधों की बढ़वार रुक जाती है तथा रोगों के प्रति उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे उत्पादन में गिरावट आती है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए तो फसलों को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। उन्होंने शीतलहर और पाले से बचाव के लिए किसानों को कई महत्वपूर्ण उपाय अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि फसलों में बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का अनुशंसित मात्रा में छिडक़ाव करने के साथ-साथ फास्फोरस एवं पोटाश युक्त उर्वरकों का प्रयोग करने से जड़ों का बेहतर विकास होता है तथा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
डॉ. गोदारा ने कहा कि शीतलहर के दौरान हल्की एवं बार-बार सतही सिंचाई करना लाभकारी रहता है, क्योंकि इससे खेत का तापमान संतुलित बना रहता है। जहां संभव हो वहां स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का प्रयोग कर पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि रात के समय हल्की सिंचाई करने से पाले से होने वाले नुकसान में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है।
डॉ.गोदारा ने किसानों से अपील की कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों पर नियमित रूप से ध्यान दें और किसी भी प्रकार की समस्या या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय पर उचित सलाह एवं उपचार उपलब्ध कराया जा सके।