PANIPAT AAJKAL: पानीपत में हिन्दी की गूँज की प्रभारी कंचन सागर के निवास स्थान पर सभी सदस्यों ने एक साथ मिलकर हिन्दी की गूँज सम्मान समारोह से प्राप्त स्मृति चिन्ह, शॉल एवं सर्टिफिकेट्स कंचन सागर को भेंट किये । कंचन सागर के प्रोत्साहन से ही पानीपत से चौदह सदस्य हिन्दी की गूँज से जुड़ चुके हैं। हिंदी से बढ़ते लगाव-झुकाव और प्रेम का यह सफ़र अब निरंतर आगे की तरफ ही बढ़ रहा है । उम्र कभी भी किसी की उन्नति में बाधा नहीं बन सकती। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह था कि हिंदी की गूँज के पानीपत के 4 सदस्यों ने अपने बरसों पुराने सपने को पूरा करते हुए पुस्तकें लिखी हैं जिनके नाम हैं…..
मोनिका सलूजा ‘नूर’ की पुस्तक“खयालों का मंथन”, नीलम मेहता की “नीलम के हाइकू”, सरोज आहूजा की “दोष किसका” और ज्योत्सना गर्ग की “अतीत के झरोखों से”।
आज यहाँ सबने अपनी पुस्तकों से संबंधित तजुर्बे भी साँझा किए ।
इस अवसर पर कंचन सागर, सिमरन गिरधर ,डॉ॰ वी.के. भाटिया ,कृष्णा सडाना, सरोज अहूजा, नीलम मेहता और रेनू बंसल , मोनिका सलूजा “नूर”, ज्योत्सना गर्ग , विद्या सागर भाटिया, वीना भाटिया और सॉंझी सागर उपस्थित थे।
कंचन सागर ने डॉ.रमा शर्मा और हिन्दी की गूँज की कार्यकारिणी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हम सब के ह्रदय में हिन्दी के प्रति छिपे भाव को प्रकट कर दिया है,जागृत कर दिया है।
यह जानकारी मोनिका सलूजा और ज्योत्सना गर्ग ने संयुक्त रूप से दी।