-अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्र छात्राओं के साथ एक क्विज कंपटीशन और जागरूकता रैली का आयोजन ।
-अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आज 10 दिसंबर 2025 को आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पानीपत में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पानीपत सचिव वर्षा शर्मा जी के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण
PANIPAT AAJKAL , एमडीडी ऑफ इंडिया, मानव तस्करी विरोधी इकाई और आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सयुक्त बैनर के तहत बुधवार, 10 दिसंबर को छात्रों के बीच मानवाधिकारों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक क्विज कंपटीशन और एक भव्य रैली का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में एमडीडी ऑफ इंडिया से जिला समन्वयक संजय कुमार ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर, 1948 को अपनाया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर इंसान जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान का हकदार है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
कक्षा 11वीं के छात्र छात्राओं के लिए एक ज्ञानवर्धक क्विज कंपटीशन आयोजित किया गया। इसमें मानवाधिकारों से संबंधित प्रश्न पूछे गए, जिसने छात्रों को इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में अपने ज्ञान और जागरूकता को रचनात्मक रूप से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक विद्यालय प्रांगण से कोर्ट कॉम्प्लेक्स होते हुए स्काईलार्क और पुराने बस स्टैंड से एक जागरूकता रैली निकाली। हाथों में मानवाधिकार संदेशों और नारों वाले बैनर और पोस्टर लेकर, प्रतिभागियों ने समाज में सभी के लिए मानवाधिकारों की सुरक्षा और सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया।
मानव तस्करी विरोधी इकाई स्टेट क्राइम ब्रांच इंचार्ज एस आई संदीप कुमार ने कहा कि बच्चों के भी मानवाधिकार उतने ही महत्वपूर्ण है और किसी बच्चे को शिक्षा और खेलकूद से वंचित कर बाल मजदूरी करवाना या बाल विवाह करना उनके अधिकारों एक उल्लंघन है और इसके लिए कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण से पैनल एडवोकेट पूनम ने कहा कि छात्र छात्राओं को मानवाधिकार और कर्तव्यों के बारे में जानना बेहद महत्वपूर्ण है, तभी हम एक जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण कर पाएंगे।
स्कूल के प्रधानाचार्य मनीष घनघस ने कहा कि "हमारा उद्देश्य इन युवा दिमागों में सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। ऐसे आयोजन छात्रों को अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों को समझने और उनका समर्थन करने का अवसर प्रदान करते हैं।"
इस पहल ने छात्रों को मानवाधिकारों के महत्व के बारे में शिक्षित करने और उन्हें मानवाधिकारों के सम्मान के प्रति जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।